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जैसा राजा वैसी प्रजा




एक नगर में एक नवयुवक राज्य गद्दी पर बैठा तो उसने गांव के सभी परिवारों को बुलाया और उनसे पूछा कि आप बताइए आपको मेरा राज्य अच्छा लग रहा है या फिर मेरे पिताजी का  या  दादा जी का आपने हमारे तीनों पीढ़ियों का राज्य देखा  है बेचारे सब चुप रहे एक बहुत बुढा आदमी खड़ा होकर कहने लगा कि महाराज हम आपकी प्रजा है आप उम्र में छोटे हैं तो क्या हुआ आप हमारे मालिक हैं अब हम आपके बारे में निर्णय कैसे करें कि कौन योग्य कौन बढ़िया है और कौन घटिया यह हमारी क्षमता नहीं है मेरे बारे में पूछे तो मैं अपने बात कह सकता हूं पर आपके परीक्षा नहीं कर सकता राजा ने कहा अच्छा अपनी बात बताओ वह कहने लगा जब आपके दादा जी का राज्य था उसमें बहुत जवान था पढ़ा लिखा था शरीर में बल भी अच्छा था मैं एक लाठी पास में रखता था उसमें यदि 50 आदमी एक साथ भी सामना करने के लिए आ जाते तो मैं हार नहीं खाता बल्कि वह सब को मार दूं ऐसा मेरा विश्वास था .








एक दिन मैं किसी काम से जा रहा था रास्ते चलते मेरे कान में किसी स्त्री की रोने की आवाज आई तो मैंने सोचा चल कर देखें क्या बात है मैं आवाज की दिशा में चला गया तो देखा कि एक सुंदर युवती अकेले जंगल में बैठी हो रही है उसने बहुत कीमती गहने कपड़े पहन रखे थे वह अचानक उसके पास पहुंचा तो वह डर गई और एकदम चुप हो गई मैंने बड़े प्यार से कहा की बहन घबराओ मत बताओ कि तुम कौन हो और क्यों रो रही हो मेरा ऐसा करने पर वह स्वस्थ हुई और बोली मैं पीहर से ससुराल जा रही थी साथ में 24 गाड़ियां और उट थे रास्ते में डाकू मिल गए तो उनसे मुठभेर हो गई मेरे संबंधी और डाकू आपस में लड़ने लगे मुझे डर लगा तो भाग कर जंगल में चली आई यहां आकर बैठ गई अब उनका क्या हाल हुआ यह तो भगवान जाने किंतु मैं किधर जाऊं यह भी मुझे रास्ता मालूम नहीं.  मेरा गांव दूर रह गया लेकिन ससुराल पास में ही है लेकिन मैं नहीं जानती क्या करूं यह सोच कर रोना आ रहा है.  मैं उसके ससुराल को जानता था इसलिए मैंने उससे कहा बहन तुम चलो डरने की कोई बात नहीं है मैं तुम्हारे साथ हूँ. पूछने पर उसने अपने ससुर का नाम कागज पर लिखकर बताया मैं उसके ससुर को जानता था इसलिए उससे उसके ससुराल मे छोड़ा .रात हो चुकी थी सब लोग तरह-तरह की चिंता कर रहे थे वह लोग बहुत दुखी थे क्योंकि  बहू के शरीर पर बहुत से गहने थे . बहू को सही सलामत पहुंचे देखकर सबके मन में प्रसन्नता छा गई उसे स्त्री अपने घरवालों से कहा इस सज्जन को मैं  पिता कहूँ या भाई कहूँ इन्होने मुझे बड़े प्यार से धीरज दिलाया और यहां तक पहुंचा है उसके ससुर मुझे इनाम देने के लिए पांच-सात सौ रूपये  लाये और लेने का आग्रह करने लगे.







मैंने अपना कर्तव्य समझकर यह काम किया था कोई दुख है तो उसको दूर हो जाए इसलिए मैंने रूपये नहीं लिए. मैंने सोचा की अपने कर्तव्य पालन की बिक्री नहीं करूंगा मेरे मन में रुपए ना लेने से बड़ा संतोष रहा  मैं वापस चला गया यह बात तो आपके दादा जी के समय की थी..  आपके पिताजी का का राजा आया मेरे व्यापार में मुझे बहुत नुकसान हुआ  मैंने सोचा अगर उस समय मैं उससे स्त्री की सहायता नहीं करता और उसे  थोड़ा डरा धमकाकर उससे उसके   गहने छीन लेता तो आज मुझे बहुत सहायता हो जाती है मुझे यू पैसों के लिए मोहताज नहीं पड़ती लेकिन अब क्या फायदा .  उसके बाद आप का समय आया अब मैं बूढ़ा हो गया इस्त्री भी नहीं है अब मन में ख्याल आता है उसमें अगर मैं उसे जबरदस्ती अपनी स्त्री बना लेता तो कम से कम  आज वह मेरी सेवा करती मेरे बच्चे होते तो वो मेरी देखभाल करते राजन मैंने आपको आप तीनों के राज के समय की और अपने मनोदशा बताई अब आप ही विचार  कर ले कि किसका राज्य सही है  राजकुमार समझ गया जैसा राजा वैसी प्रजा..