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जिउतिया व्रत 2018 कब है जिउतिया व्रत की कथाएं jitiya vrat katha hin hindi









हर माता के लिए उसके संतान से किमती चीज कुछ नहीं होती. हर माँ चाहती है की उसका पुत्र दीर्घायु रहे . इसी क्रम में संतान के लिए हर माता  जीवित पुत्रिका व्रत या जिउतिया रखती हैं. जिउतिया अश्विन मास  के अष्टमी के दिन रखा जाता है लेकिन इसकी तयारी  सप्तमी से ही शुरू  हो जाती है।  इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं तथा दुसरे दिन पारण करती हैं . जैसा की इस साल जितिया २ अक्टूबर को हो रहा है जिसकी सूचि इस प्रकार है .
1 अक्टूबर  2018
 नहाय खाय
2 अक्टूबर   2018
 मुख्य व्रत
3 अक्टूबर   2018
पारण




जीवित पुत्रिका , जिउतिया  व्रत की कथाएं vrat katha in hindi 
जीवित पुत्रिका व्रत से मुख्य रूप से दो कथा जुडी हुई है . पहली कथा है चील और सियारिन की तथा दूसरी कथा जीमूतवाहन की है

 चील और सियारिन कथा chil or siyarin ki katha kahani in hindi :- 

एक समय की बात है एक जंगल में चील और सियारिन दो सखी रहती थी एक दिन उन्होंने ने कुछ स्त्रियों को पूजा करते देखा तो चिल ने  सियारिन से पूछा बहन ये किस चीज की पूजा कर रही हैं  तो सियारिन ने कहा बहन ये अपने संतान की लम्बी आयु के लिए जीवित पुत्रिका व्रत कर रही हैं. तब चिल ने कहा  बहन हम भी ये व्रत करेंगे फिर दोनों ने एक साथ व्रत बहुत नियम के साथ किया . लेकिन सियारिन को भूख सहन नहीं हुआ और उसने चुपके भोजन ग्रहण कर लिया जबकि चील ने बहुत ही बहुत ही नीयम के साथ व्रत किया . कुछ दिन बाद सियारिन के सभी बच्चे मर गए जबकि चील के सभी बच्चे दीर्घायु हुए।  .




जीमूतवाहन की कथा jivit mohan ki katha in hindi :- 

प्राचीन काल में गन्धर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन हुए . वे बहुत ही दयालु तथा परोपकारी थे जब उन्हें रजा बनाया गया तो उन्हें राज पाट में बिलकुल मन नही लगा तो उन्होंने राज पाट अपने भाइयों को देकर स्वयं वन में चले गए एक दिन वन में घूमते- घूमते उन्हें एक वृद्धा रोती  हुई दिखाई दी जब उन्होंने उसके रोने का कारन पूछा तो उसने बताया मैं नागवंश की स्त्री हूँ मेरा एक ही पुत्र है पक्षी राज गरूर मुझसे हर दिन एक नाग की बलि मांगते हैं और आज मेरे पुत्र की ही बारी है उसकी व्यथा सुन कर जीमूतवाहन ने कहा ऐसा कीजिये आज में आपके पुत्र की जगह पक्षी राज की बलि बन जाता हूँ. ऐसा ही हुआ गरुड़ राज आये  और लाल कपडे में बांधे  हुए जीमूतवाहन को लेकर चले गए जब वो उसे लेकर पहाड़ पर पहुचे देखा ये तो मानव है तो उन्होंने इस प्रकार बलि बनाने का कारन पूछ तो जीमूतवाहन ने सारी  कहानी सुना दी. तब पक्षी राज गरुड़ को बहुत पछतावा हुआ और उन्होंने आगे से नाग बलि नहीं लेने का वरदान दिया . इस प्रकार जीमूत वहां ने नाग स्त्री के पुत्र  को बचाया कहा जाता है तब से जीवित पुत्रिका व्रत सुरु हुआ।