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ADHYATMIK STORY IN HINDI

दो पैसे का दान KRISHNA BHAGAWAN STORY IN HINDI

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा....
अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी।
जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला। READ MORE



सारी सफलता प्रभु की
एकबार देवताओं ने दैत्यों पर भरी विजय प्राप्त की जिससे उन्हें अभिमान होगया और वे अपने को सर्वश्रेष्ठ समझने लगे , देवताओं के इस  घमंड को तोडना जरुरी था, इसलिए परमात्मा ने इन एक लीला रची। देवताओ के सामने एक यक्ष का रूप लेकर आगये , देवता उनको पहचान न सके तो , तो देवराज इंद्र ने अग्निदेव को उस यक्ष का पता लगाने भेजा। READ MORE









गाली लौटा दी hindi dharmik story

एक बार गौतम बुद्ध राजगृह के वेणुवन नमक स्थान में ठहरे थे | एक ब्राम्हण था जिसका कोई संबंधी बौध भिक्षु बन गया गया था | इसलिए वह बुद्ध के पास जाकर उनको गालियां  देने लगा|
भगवान बुद्ध उसकी गालियां  शांत मन से सुनते रहे | ब्राम्हण को ये देखकर बार आश्चर्य हुआ | READ MORE








एक राजा था . उसके तीन पुत्र थे. राजा जब वृद्ध होने चला उसने सोचा अब सही समय अगया है जब मैं अपनी गद्दी अपने पुत्र को दे दूँ. राजा चिंतित था कियुंकि उसके तीन पुत्र थे और वो गद्दी किसे दे जो राज-पाट अच्छे से चला ले. तब राजा के दिमाग में एक उपाय सुझा उसने अपने तीनों पुत्रों को बुलाया और बोला मैं तुम तीनों को सौ-सौ रुपये दे रहा हूँ . और तीनों को एक-एक कमरा दे रहा हूँ . एक सप्ताह के अन्दर जो इन कमरों को पूरा भर देगा मैं उसे अपना उत्तराधिकारी बनाऊंगा 









एक बार नारदजी भगवन विष्णु के पास पहुचे और बोले , भगवन धरती पर बहुत पाप बढ़ गया है अच्छे लोगों के साथ बुरा और बुरे लोगों के साथ अच्छा हो रहा है ये देख कर मन क्षुब्ध होजाता है. तो भगवन बोले ऐसा क्या होगया.. अगर कोई घटना याद हो तो बताइये।

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प्रभु की कृपा

एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए जब वे स्नान करके बाहर निकले तो लक्ष्मण ने देखा की उनकी धनुष की नोक पर रक्त लगा हुआ था !
उन्होंने भगवान राम से कहा -" भ्राता ! लगता है कि अनजाने में कोई हिंसा हो गई ।"
दोनों ने मिटटी हटाकर देखा तो पता चला कि वहां एक मेढ़क मरणासन्न पड़ा है 

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ठगे गए गणेश जी


एक वृद्ध अंधी  महिला थी , वो गणेश भगवान की  बहुत मन से उपासना पूजा करती थी। एक दिन भगवान प्रशन्न होकर प्रकट होगये और बोले  हम तुम्हारी साधना से  बहुत प्रसन्न है की कैसे तुमने नेत्रहीन होकर भी मेर इतनी पूजा की तुम कोई एक वरदान मांगो हम उसे अभी पूरा करेंगे। बुढ़िया ये सुनकर संकोच में पर गयी की'आखिर क्या मांगे।  तो वो बोली प्रभु  आप आगये मुझे और क्या चाहिए मुझे तो सबकुछ मिल गया फिर भी गणेश जी

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